Sun05202012

Last update01:58:58 PM

Citizen Journalist

क्या प्राइम टाइम को डर्टी पिक्चर गंदा कर देती अश्लील विज्ञापन नही!

saurabhसौरभ सक्सेना:क्या सच में हम टीवी पर प्राइम टाइम में फिल्म 'डर्टी पिक्चर' को अपने पूरे परिवार के साथ देख सकते है? इस सवाल को जन्म तब मिल गया जब डर्टी पिक्चर को सोनी चैनल पर दिखाया जाना था पर आखिरी समय में इसके प्रसारण को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने रोक दिया। मंत्रालय ने फिल्म को दिन में 12 बजे और रात में 8 बजे दिखाये के बजाय रात में 11 बजे के बाद और सुबह 8 बजे तक दिखाया जाना उचित ठहराया।मंत्रालय की ओर से कहा गया कि फिल्म की भाषा और द्रश्य काफी अश्लील है पर जब टीवी पर अश्लील विज्ञापनों का प्रसारण होता है और सोनी टीवी के ही शो “बड़े अच्छे  लगते है” में अभिनेता राम कपूर और अभिनेत्री साक्षी तंवर के बीच दिखाई गये सीन भी अश्लील थे क्या इनसे बच्चों पर गलत असर नही पड़ेगा...? आज कल टीवी पर ऐसे शो की भरमार है जिससे बच्चों के ही नही बल्कि युवाओं के दिमाग पर भी गलत असर पड़ सकता है। जब बिग बाँस ने अश्लीलता की सारी हदों को पार कर दिया था फिर भी उस शो को प्राइम टाइम पर ही दिखाया गया और यदि सरकार अब ये तर्क देना चाहती कि उसने अपनी गलतियों से सीख ले ली है तो अभी भी टीवी पर अश्लील विज्ञापनों और युवाओं को भमित करते शो को क्यो नही नही रोका जाता है। क्या बच्चों के दिमाग में यह सवाल पैदा नही किया जा रहा कि आखिरकार11 बजे के बाद टीवी पर आता क्या है? अगर कभी बच्चों के मां-बाप रात 11 बजे के बाद टीवी देखते है तो उनके मन में अपनें मां-बाप के प्रति गलत धारणा नही बनेगी?

विधायक सिधु ने गरीब विद्यार्थियों को बांटे जूते

575478_278896002201795_100002441935474_609039_715395145_nमोहाली| आर के विक्रमा शर्मा |  स्थानीय फेज ग्यारह स्थित सरकारी स्कूल  प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों को नये स्कूल वर्दी वाले जूते वितरित किये इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए मोहाली के दूसरी बार निरंतर एम् एल ऐ बनने वाले कांग्रेसी लीडर बलबीर सिधु के ओ एस डी सोम दत शर्मा (जाने माने वैटरन खिलाडी )   ने बताया कि  स्कूल में जाकर बच्चों को खासकर गरीब जरूरत मंद बच्चों को गर्मियों बरसातों से राहत दिलाने की मंशा से निस्वार्थ भाव से मोहाली के विधायक बलबीर सिंह सिन्धु ने इन बच्चों के नन्हे पैरों को अब पड़ने वाली गर्मियों और
बरसातों से राहत दिलाने के लिए उपकार किया है ! बच्चों के चेहरे  की ख़ुशी देख कर सिधु ने बच्चों को  खूब दुलारा और पुचकारा! इस मौके पर स्कूल  प्रिंसिपल सहित  पंजाब स्टेट अवार्डी डाक्टर भोला  सिंह मावी और हिंद संग्राम परिषद की  सक्रिय पदाधिकारी संतोष गुप्ता आदि भी मौके पर मौजीद थीं !  बच्चों ने सिधु के लिए मंगल कमाना की ! प्रिंसिपल ने सिधु का इस विशेष उपकार सेवार्थ हेतु तय दिल से शुक्रिया  अदा किया !

विकल्पों के अभाव में होती हार जीत !

Ajitesh_mishra01अजितेश मिश्रा:  दिल्ली नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को परास्त करते हुये एक बड़ी जीत दर्ज की। हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में भी उत्तराखंड को छोड़कर कांग्रेस किसी भी बड़े राज्य में जीत का स्वाद नहीं चख़ सकी और मुंबई निगम चुनावों में भी उसे हार का मुंह देखना पड़ा। सवाल यह उठता है कि भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के परिणाम का अर्थ क्या निकाला जाये? इसे केंद्र की कांग्रेस सरकार के खिलाफ तैयार हो रहे माहौल के तौर पर लिया जाये, पिछले 15 सालों से दिल्ली पर राज कर रही शीला दीक्षित सरकार के प्रति जनता के असंतोष की भावना के रूप में देखा जाये या मान लिया जाये कि जनता के पास विकल्पों की कमी है ? अगर हम इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिये उत्सुक है तो कहीं और जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में आये चुनाव परिणामों का टटोल कर इनका जवाब जाना जा सकता है। इन सभी परिणामों में आम जनता के मन में भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्से को साफ देखा जा सकता है। एमसीडी चुनाव में भी भाजपा की जीत का श्रेय उसके कामकाज को नहीं बल्कि कांग्रेस की विफलताओं को जाता है। भाजपा के चुनाव प्रचार का सारा जोर देशभर में कांग्रेस के प्रति पनप रहे गुस्से की चिंगारी पर घी डाल कर आग में तब्दील करना था जिसमें वह सफल भी रही। ये चुनाव बताते हैं कि जनता के पास विकल्पों की बहुत कमी है। जनता यह सोचने पर मजबूर हो जाती है कि आखिर वह वोट किसे दे ? यही कारण है कि भाजपा की रणनीति अपने पक्ष में जनता से वोट देने की अपील करने से ज्यादा सत्ता परिवर्तन की नीति पर अधिक टिकी रहती है। उसे अपनी जीत का भरोसा कम होता है और कांग्रेस की हार की उम्मीद ज्यादा। ऐसी स्थिति में 2014 के चुनावों के परिणामों की अभी से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। क्योकिं उसमे कांग्रेस का पलड़ा हल्का जरूर होगा, लेकिन भाजपा का पलड़ा भी भारी नहीं होगा। ऐसे में देश को चाहिये ऐसे विकल्प जो सत्ता के लालच से ऊपर उठ कर जनता की कसौटी पर ख़रे उतर सके, जिन्हे जनता उनके अच्छे काम और नाम के लिये वोट दे न कि विकल्पों के अभाव में मजबूरी मान कर ।

चुनावी सरगर्मियाँ जोरों पर

IMG0377Agngदीपक शर्मा 'कुल्लुवी', दिल्ली में 15 अप्रैल  को होने वाले एमO सीO डी O चुनावों की सरगर्मियाँ जोरों पर है हर तरफ हर पार्टी के उम्मीदवार अपनें समर्थकों के साथ ढोल ढमाके के साथ  चुनाव प्रचार करते आ रहे हैं I कालकाजी से इस बार कांग्रेस उमीदवार श्री वीरेंद्र कसाना जी का पलड़ा निश्चित तौर पर दूसरे उमीदवारों से भारी लग रहा है क्योंकि अपनें क्षेत्र में कसाना बंधुओं नें सम्पूर्ण विकास कार्य करवाए हैं I मृदुभाषी,शांत,हंसमुख कसाना जी का व्यक्तित्व वैसे भी लोकप्रिय है ओछी राजनीति से वोह कोसों दूर रहते हैं  सभी लोग उन्हें दिल से चाहते हैं कोई भी कैसा भी कार्यक्रम हो भजन संध्या हो कसाना बंधु हमेशा अग्रणी रहते हैं कसाना जी जो वादा करते हैं उसे निभाने की क्षमता भी रखते हैं उनकी यही खासियत उन्हें बाकी उमीदवारों से अलग करती है I उनकी जीत निश्चित मानी जा रही है I

अश्लीलता का अड्डा बनता छोटा पर्दा

 

bade_achhe_lagte_hain_Ram-Kapoor-Saakshi-Tanwar_K_Himaanshu_Shukla-1अक्सर छोटे पर्दे के कलाकारों से हमे सुनने को मिलता है कि छोटा पर्दा अब छोटा नही रह गया क्योकि इस छोटे पर्दे को बडे पर्दे की अपेक्षा कई ज्यादा लोग देखते है। लेकिन आज कल छोटे पर्दे को बडे पर्दे के समकक्ष लाने के लिये जो नया हथकंडा अपनाया जा रहा है वो है अश्लीलता। अब तक तो हम सिर्फ कॉमेडी शो में अश्लील भाषा को सुनते थे और उसी को अश्लीलता मान लिया करते थे, लेकिन अब टीवी को अश्लीलता के साथ बडा पर्दा बनाने का जिम्मा जिसने उठाया है वो है एकता कपूर, जिन्होने हाल ही में सोनी टीवी के शो “बड़े अच्छे  लगते है” में छोटे पर्दे की सारी मर्यादाओ को ही पार कर दिया। शो में अभिनेता राम कपूर और अभिनेत्री साक्षी तंवर के बीच दिखाई गये सीन कुछ ज्यादा ही अश्लील थे। बात यही खत्म नही होती इसी चैनल के एक और शो “क्या हुआ तेरा वादा” में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। इन दोनो शो की निर्माता एकता कपूर इन दिनों अपनी गत साल की फिल्म डर्टी पिक्चर की सफलता का फ़ॉर्मूला टीवी पर अपनाती दिख रही है पर  ऐसे में  सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या छोटे पर्दे का इतना अश्लील होना ठीक है ? सिनेमा हाल में अश्लील फिल्म देखने से बच्चो को रोका जा सकता मगर घर में टीवी के चैनल बदलते वक़्त आखिर कैसे रोका जा सकता है? आज कल हर घर में टीवी का रिमोट बच्चो के हाथ में होता है ऐसे में बच्चो के बीच इसके गलत सदेंश ही जायेगे।                    -

(सौरभ सक्सेना/अजितेश मिश्रा)