आगरा,(रक्षित महाजन)... यहां बापू ने बोए थे स्वतंत्रता संग्राम के बीज रघुपति राघव राजा राम... ईश्वर अल्ला तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान...। कभी चरखा चलाकर सूत कातते वक्त यह भजन यहां खूब सुनाई पड़ता था। यहीं पर विचारमग्न होकर बापू अपने स्वतंत्र भारत की तस्वीर बुना करते थे। अहिंसा और सत्य के अस्त्र से अंग्रेजों की जड़ें काटने वाले महात्मा गांधी का 1929 में किया गया आगरा जनपद का दौरा एतिहासिक था। इस दौरान युग पुरुष यमुनापार स्थित बृजमोहन लालजी के बाग व आरामगाह (वर्तमान में गांधी स्मारक, खलिहाई मंडी) में 11 दिन रुके थे। यहां उन्होंने सभाएं की और गावों के दौरे कर जन जागरण की मुहिम चलाई। इसका परिणाम भावी राष्ट्रीय आंदोलन में जनता की भागीदारी के रूप में सामने आया। 11 सितंबर. 1929 को महात्मा गांधी के आगरा आने पर जन सैलाब उनके दर्शन को उमड़ पड़ा। बड़ी कठिनाई से उन्हें विश्राम स्थल पहुंचाया जा सका। उनके साथ आचार्य कृपालानी, माता कस्तूरबा, मीरा बहन और प्रभावती (जयप्रकाश नारायण की पत्नी) भी थीं। हीवेट पार्क में हुई थी सभा 11 सितंबर, 1929 को हीवेट पार्क (वर्तमान पालीवाल पार्क) में सभा हुई थी। इसमें महात्मा गांधी ने कहा कि मैं यहां असहयोग की शक्ति में विश्वास की पुनर्घोषणा करने आया हूं। आप सबको अभी से जनवरी, 1930 के लिए तैयारी करनी है। भारतीय कांग्रेस कमेटी ने शर्तें तय कर दी है जिनकी पूर्ति पर ही अहिंसात्मक उपायों से स्वराज्य मिल सकता है। ये शर्तें हैं खादी द्वारा विदेशी वस्त्र बहिष्कार, मादक द्रव्य निषेध तथा हिंदुओं द्वारा अस्पृश्यता त्याग। चूंकिए मत, सब कार्य कांग्रेस संगठन से ही संभव है। मैं चेतावनी देता हूं कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे तो घोषणा मात्र से दिसंबर में स्वराज्य टपकने वाला नहीं है। 1948 में स्थापित हुआ स्मारक सन् 1948 में उन्होंने पिता की स्मृति में गांधी स्मारक ट्रस्ट के पक्ष में स्मारक की स्थापना करवाई थी। 2 अक्टूबर 1955 में ट्रस्ट के सहयोग से निगम ने म्युनिसिपल महिला औषधालय व शिशु कल्याण केंद्र बनवाया। आज के गांधी स्मारक के आइने में सुनहरी यादें मुश्किल नजर आती हैं।| < Prev | Next > |
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