झज्जर, (अमित पोपली)… करीब आठ वर्ष पूर्व गांव दुलीना में पांच दलितों की हत्या करने के मामले में शनिवार को एडीजे एके जैन ने सात आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया है। जबकि इसी मामले में शेष बचे 19 आरोपियों को अदालत द्वारा बरी किया गया है। उधर, दोषी करार दिए गए सात आरोपियों को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच रोहतक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। ज्ञात हो कि अक्तूबर 2002 में जिला झज्जर के गांव दुलीना में दशहरे की शाम को भारी भीड़ ने पांच लोगों की निर्ममता पूर्वक पीटते हुए हत्या कर दी थी। आरोप है कि उक्त लोगों में शामिल काफी लोगों को दशहरे मेले के दौरान यह सूचना मिली थी कि दुलीना क्षेत्र के आस-पास में पांच लोग गाय की खाल उतार रहे है। यह सूचना कुछ ही समय में जंगल की आग की तरह फैल गई और वहां पर लोगों का भारी जमावड़ा लग गया। जिसके चलते आक्रोश पूर्वक यह घटना घटित हुई। मामले पर गौर किया जाए तो उस दौरान तीन-चार दिन के लिए संसद का कामकाज भी प्रभावित हुआ था तथा राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने यहां पहुंचते हुए इस दलित हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की थी। जिसके चलते यह मामला अधिक पेचीदा हो गया था। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में कुल 28 लोगों के खिलाफ भांदस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जबकि 28 में से दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। शनिवार को 26 आरोपी अदालत में पेश हुए और उनमे से 7 लोगों को दोषी करार दिया गया है। अदालत की ओर से दोषी करार दिए गए सात लोगों में गऊशाला के प्रधान ओम प्रकाश कबलाना, पार्षद शिशुपाल मलिक, डॉ. रणबीर मल्हान, जगबीर मल्हान, सतबीर सिंह राठी, रमेश सुरहा तथा सुबे सिंह निवासी किलोई शामिल है। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से एतिहात के तौर पर न्यायिक परिसर क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती की थी। डीएसपी बलवान सिंह राणा की अगुवाई में पुलिस की विभिन्न टीमों पूरे क्षेत्र पर नजर जमाए हुई थी। किसी भी अप्रिय घटना पर काबू पाने की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए भी विशेष इंतजाम किए गए थे। इधर, अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद सातों दोषियों को पुलिस की भारी मौजूदगी में बाहर लाया गया। जबकि सैंकड़ों लोग न्यायिक परिसर में फैसले की इंतजार में दिन भर वहीं पर डटे हुए थे।
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