सप्ताह के व्रत-त्योहार:
22 अप्रैल: नवीनचंद्र-दर्शन, बालेंदु-पूजन, महर्षि पाराशर जयंती, देवदामोदर तिथि (असम)।
23 अप्रैल: प्राचीन मतानुसार श्रीपरशुराम जयंती, बाबू कुंअर सिंह जयंती (बिहार-झारखंड)।
24 अप्रैल: अक्षय तृतीया, चंदन यात्रा (गौड़ीय वैष्णव), मातंगी जयंती, श्रीबांकेबिहारी के वार्षिक चरण-दर्शन (वृंदावन)।
25 अप्रैल: वरदविनायक चतुर्थी व्रत, चिंतामणि गणेश दर्शन-पूजन (काशी, उज्जयिनी)।
26 अप्रैल: आद्यशंकराचार्य जयंती, सूरदास जयंती, सोमनाथ प्रतिष्ठा महोत्सव (गुजरात)।
27 अप्रैल: श्रीरामानुजाचार्य जयंती, चंदन छठ (बंगाल), स्कंदषष्ठी व्रत, वैभवलक्ष्मी व्रत-कथा। संध्या टण्डन।
(सौरभ सक्सेना)

हरिद्वार ,अन्तरिक्ष शर्मा :चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर शुक्रवार को भक्तों ने कलश स्थापना के बाद शहर के मंदिरों में मां शैलपुत्री की उपासना की। व्रत धारियों ने घरों में भी पूजा पाठ कर सुख शांति की कामना की। नवरात्र के नौ दिनों में श्रद्धालु मां के अलग-अलग रूपों की उपासना कर सुख-समृद्धि व मंगल की कामना करते हैं। इसीलिए इस दिन गंगा स्नान कर ब्रह्मा जी और नववर्ष के पंचांग की पूजा-अर्चना की जाती है। शुक्रवार को करीब पांच लाख स्नानार्थियों ने गंगा में डुबकी लगाई। इस मौके पर धार्मिक स्थलों में नूतन वर्ष के पंचांग की पूजा अर्चना हुई।
आज नवरात्र का दूसरा दिन है। इस दिन मां के ब्रह्माचारिणी स्वरुप की पूजा की जाती है। मान्यता है की नवरात्र में मां की पूजा करने से मन की हर मुराद जरुर पूरी होती है। मां के दर्शनों के लिए मंदिरों में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पडा है। दिल्ली के झंडेवालान और कालकाजी मंदिरों में भी भक्त दर्शनों के लिए पहुंच रहे है।
सोनीपत,प्रियंका शर्मा: चैत्र नवरात्री विक्रम संवत के आरंभ(चैत्र मास)में मनाया जाता है ।चैत्र मास अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च -अप्रैल महीने में होता है। नवरात्री ऐसे तो वर्ष में दो बार मनाया जाता है :- एक चैत्र मास में दूसरा आश्विन मास में। चैत्र मास नए संवत के तो आश्विन मास की नवरात्री दुर्गा पूजा और दशहरा के मशहूर है। चैत्र सनातन पंचांग का प्रथम मास है।चैत्रमासके प्रथम पक्षमें होलीके बाद पडनेवाले पहले सोमवार अथवा गुरुवारको किया जाता है। इस व्रत को करनेसे व्रतीके कुलमें दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्रोंके समस्त रोग, शीतलाकी फुंसियोंके चिन्ह तथा शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं। इस व्रत को करनेसे शीतला देवी प्रसन्न होती है। सनातन धर्म में इसे संवत्सर कहते हैं जिसका अर्थ है ऐसा विशेषकर जिसमें बारह माह होते हैं। फाल्गुन और चैत्र मास वसंत ऋतु के माने गए हैं। फाल्गुन वर्ष का अंतिम मास है और चैत्र पहला मास।सनातन धर्म में पुराणों के अनुसार चैत्र की नवरात्री की नवमी को श्री राम चन्द्र जी का जन्म हुआ था। जिसे हम राम नवमी के उपलक्ष के रूप में मनाते है और सनातन धर्म के नववर्ष के चैत्र मास से ही शुरू होने के पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रह्मदेव ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। ताकि सृष्टि निरंतर प्रकाश की ओर बढ़े।इसे संवत्सर कहते हैं जिसका अर्थ है ऐसा विशेषकर जिसमें बारह माह होते हैं। माह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है की इस चन्द्र क्लासे जीवन के मुख्य आधार पेड़ -पौधों को जीवनदायी रस प्राप्त होता है ,जो ओषधियो और वनस्पतियों के रूप में प्राणियों के तन व मन के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है इसलिए भी इस दिन से वर्ष का आरम्भ शुभ माना जाता है।
नई दिल्ली,वी.के शर्मा: शिवरात्री के शुभ अवसर पर ओम विहार क्षेत्र में शिव आराधना ग्रुप की ओर से चौथा विशाल भोले बाबा का आयोजन किया गया| आयोजक बिट्टू और पाटिल कपूर ने बताया कि सांसद महाबल मिश्रा और समाजसेवी नरेश बाल्यान ने ज्योत प्रचंड की| पंजाब के सन्नी भोला (राजहंस), शिवा सागर, शैम्पी सिंह शिव शंकर, भोले भंडारी का गुणगान किया| विशाल जागरण का मुख्य आकर्षण भोले बाबा और पार्वती मैया का नृत्य रहा| 30 फुट ऊंचा भवन, बर्फ की गुफाऔर बर्फ का शिवलिंग रहे| इससे पूर्व ओम विहार इलाके में भोले बाबा की भव्य बारात का आयोजन किया गया| इस विशाल जागरण में हजारों भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर बाबा का आशीर्वाद लिया| जागरण के पश्चात सभी के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गयी| भोले बाबा के इस विशाल जागरण की सफलता के लिए सचिन कपूर, विजय, राजा, गुप्ताजी, पलटू, दीपू आदि का योगदान सराहनीय रहा|